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तब्लीगी जमात – इज़्तिमा पर अंधाधुंध खर्च कैसा है? जानिये-

भोपाल में होने वाले तब्लीगी जमात के इज्तिमा का चौथा दिन था। कई लोग तंज करते हुए कह रहे हैं कि मैंने इस बार मैंने इसके क्यों नहीं लिखा? मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मैंने तो पहले भी इज्तिमा के खिलाफ नहीं लिखा बल्कि कुछ सवाल किये थे, जिन्हें कुछ लोगों द्वारा गलत रुख दे दिया गया।

बहरहाल इज्तिमा होता रहे, भोपाल में हो या दिल्ली में, दीन की दावत आम होती रहनी चाहिए। मेरा सवाल इज्तिमा ना तो कभी था और न होगा, सवाल समाज का है। उस समाज का जो समाज इसी महीने आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कह रहा था कि मुसलमान एक दिन में पांच एकड़ तो क्या पांच सो एकड़ ज़मीन खरीदने की क्षमता रखता है। बेशक इस क्षमता से कोई ऐतराज़ नहीं है।

ऐतराज़ तो इस बात से है कि ज़मीन खरीदिए, मस्जिद बनाईए या मदरसा लेकिन समाज के युवाओं के भविष्य निर्माण की ज़िम्मेदारी भी तो आपकी ही है? या इस ज़िम्मेदारी को उठाने के लिये रशिया आएगा?
जब आप अपनी मूल जिम्मेदारी से भाग जाते हैं तब ऐतराज़ होता है। समाज में इतने कितने प्रतिभाशाली युवा हैं जो प्रतिभाशाली होने के बावजूद आर्थिक तंगी के कारण आगे नहीं बढ़ पाते।

ऐसे युवाओं को प्रोत्साहन देना, उनकी आर्थिक समस्या को दूर करना क्या समाज के मठाधीशों की जिम्मेदारी नहीं है? मैं ऐसे दर्जनों प्रतिभाशाली युवाओं को जानता हूं जो आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। आप भी अपने सर्किल में दो चार ऐसे युवाओं को जरूर जानते होंगे, जो आर्थिक तंगी की वजह से अपनी प्रतिभा को बचाए रखने के लिये सर धुन रहे हैं।

अब उन्हें तलाशिए जो मीडिया के कैमरों के सामने आकर कह रहे थे कि पांच एकड़ नहीं पांच सो एकड़ खरीदने की क्षमता रखते हैं। उनसे पूछिए कि मियां कितने प्रतिभाशाली युवाओं की फीस भरी है आज तक? क्या वह धर्म का मुद्दा नहीं है? पूछिए कि मदरसो में, इज्तिमा में बिरयानी की देगें तो उतरवा देते हो कभी मदरसो के लिये कंप्यूटर भी दोगे?

सवाल तो यही हैं, अपने आस पड़ोस, रिश्तेदारी और समाज में दम तोड़ रही प्रतिभा को आर्थिक तंगी के कारण दम मत तोड़ने दीजिए, बल्कि उसे दम तोड़ने से बचाईए, ताकि वह समाज का नाम रौशन कर सके। ऐसी अपील हर एक धार्मिक आयोजन, इज्तिमा से की जानी चाहिए, और न सिर्फ अपील की जाए बल्कि उन पर अमल भी किया जाए।

जिस तरह तब्लीगी जमात के लोग हर रोज़ लोगों को पकड़ पकड़ मस्जिद में लाते हैं उसी तर्ज पर भी ऐस प्रतिभाओं को तलाशिये जो आर्थिक तंगी के कारण दम तोड़ रही हैं, उन्हें दम तोड़ने से बचाईए और सही जगह पर लगाईए, और इस तरह युवाओं का भविष्य निर्माण खुद ब खुद हो जाएगा।
Wasim Akram Tyagi✍✍

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