सोशल स्टोरी

सच खुद में एक सवाल है, जिसका ज़वाब खुद सच ही है,

क्या है सच, कैसा होता है सच, स्वाद क्या होता है सच का, इसका प्रभाव क्या होता है, सच खुद में एक सवाल है, जिसका ज़वाब खुद सच ही है,

सच इतना कड़वा होता है, इतना कड़वा होता है अगर इसको निगल जाओगे तो पेट का हाज़मा ज़बरदस्त तरीके से ख़राब हो जाता है और नही निगल पाये तो इसका नतीज़ा ये होता है कि सामने वाला जो सबसे बड़ी गलती कर रहा है अरे यही की वो सच बोल रहा है तो उसका थोबड़ा जो इतना खूबसूरत लग रहा था अगर वो फिर ख़ुद एक बार आईने में देख ले तो शायद खुद को ही एकबारगी पह्चान ने से मना कर दे

ऐसा ही कल वो बुज़ुर्ग क्या नाम था उनका, हाँ याद आया स्वामि अग्निवेश वो ही बुढ़ऊ न जाने कौनसी चुल्ल थी सच बोलने की पता नही कौनसा कीड़ा रिंगन कर रहा था सच बोलने का, माइक से चीखे ही जा रहा था बताये जा रहा था शल्य चिक्तिसा के बारे में, अरे बुढ़ऊ पगलाये गये हो कतई हम सुने थे की बुढ़ऊ एक्सपीरियंस वाले होते है अरे तुम्हारा एक्सपीरियंस क्या तेल लेने गया हुआ था जब मंच से खड़े होकर चीख चीख कर भारत की इस बेवकूफ़ जनता को सच बता रहे थे, क्यों भूल गए तुम ये भारत है यंहा क़द्र चम्तकार की होती है ।

न की तुम्हारे सड़ियल तर्कों की, भावनाओं से यंहा सरकारे चुनी जाती है न की तुम्हारे विकास कार्यो से तुम मंच से चीखते वक़्त ये क्यों भूल गये की जंहा एक बलात्कारी को अदालत से बचाने के लिए तिंरगा यात्रा निकाली जाती है, तुम ये कैसे भूल गए जंहा एक तरफ गाड़िया जलाने वालो को आरक्षण मिलता है वंही दूसरी तरफ अपना हक़ मांगने वालों को पैलेट गन ।

तुम शायद उस वक़्त भूल गए थे कि तुम किस सर ज़मी पे खड़े हो ये वो सर ज़मी है जंहा, एक आज़ादी दिलाने वाले को, धर्म की आड़ लेकर गोली से मार दिया जाता है ।

ये भारत है अग्निवेश जी यंहा LOGIC में नही MAGIC में विश्वास किया जाता है ।

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