सोशल स्टोरी

आखिर क्या वजह थी कि महमूद ग़ज़नवी ने सोमनाथ के मं’दिर को तोड़ा था ? वजह जान कर हैरान रह जाएंगे आप —

तारीख़ बताती है जब महमूद गजनवी हिंदुस्तान के सब से बड़े मंदिर सोमनाथ पहुँचा तो वहां एक विसाल लोहे का बुत मे मोअल्लक था। महमूद गजनवी ने बहुत हैरानी से उस बुत का जायज़ा लिया, फिर अपने खेमे के दानिशमंद (अक्लमंद) लोगो को महमूद ने मंदिर के अंदर बुलाया और सोमनाथ के विसाल बुत के मोअल्लक (हवा) में होने का सबब पूंछा। महमूद गजनवी ने कहा ये कैसे मुमकिन है कि एक विसाल बुत बगैर किसी टेक या सपोर्ट के हवा मे रुका रहे।

दानिशमंदों ने जवाब दिया…….जनाब इस के आस पास की दीवारे मैग्नेट (चुम्बक) की है जिस की वजह से ये बुत हवा मे झूल रहा है, दानिशमंदों ने महमूद गजनवी को मश्वरा दिया अगर आप इस मंदिर की दीवारों को खुदबा दे तो ये बुत खुद ही नीचे गिर पढ़ेग।
एक बात को ज़हन में रखये कि इस सोमनाथ के बुत की झूंटी ताक़त और जादूगरी पूरे हिंदुस्तान में मशहूर थी जिस से मुतास्सिर हो कर हज़ारो की तादाद मे लोग इस मंदिर पर अपनी फरियादें ले कर रोजाना आया करते थे और बड़े बड़े चढ़ावे चढ़ाया करते थे।
उन लोगों का अकीदा था कि जब तक ये बुत यहाँ पर मौजूद है हम पर कोई दुश्मन हमला नही कर सकता ये बुत हमारी हिफाज़त करेगा।

उस वक़्त हिंदुस्तान में इंतिहाई जहालियत का दौर था टेक्नॉल्जी की किसी को समझ नही थी वो तो इस बुत को भगवान का एक चमत्कार मानते थे उन्हें मैग्नेट (चुम्बक) की शक्तियों की कोई जानकारी नही थी, इसी लिए वो बेचारे लोग मैग्नेट को ही भगवान मानते थे।

महमूद गजनवी ने अपने लोगो की बात पर ऐतबार करते हुए दीवारों को खुदबाने का हुक्म दिया, जैसे ही दीवारों को खोदना शुरू किया गया कुछ ही देर के बाद सोमनाथ का वो विसाल तरीन बुत ज़मीन पर औंधे मुंह गिर पढ़ा। बुत को गिरता देख कर वहां के पंडितो और बड़े बड़े राजा महाराजाओ ने महमूद गजनवी से फ़रयाद करी कि इस बुत को ना तोड़ा जाए हम इस के बदले में तुम्हे बहुत बड़ी रकम देने को तैयार है। लेकिन महमूद गजनवी ने उन्हें वो तारीखी जवाब दिया जिस ने महमूद गजनवी को तारीख़ मे अमर कर दिया।

सुलतान महमूद गजनवी ने कहा, अगर आज मैंने तुमसे पैसे ले लिए तो तारीख़ मुझे बुत फरोश के नाम से याद करेगी बुत शिकन के नाम से नही। और फिर महमूद गजनवी ने उस विसाल बुत को अपने हाथों से पाश पाश कर दिया।

और साथ साथ उन लोगो के अकीदे को भी पाश पाश कर दिया जो इस बुत को अपना मुहाफ़िज़ मानते थे।
हमारा मकसद किसी की आस्था को ठेस पहुंचाना नही है बल्कि हमारा मकसद सच्चाई की हिमायत और ताईद करना है

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