सोशल स्टोरी

क्या आपको भी मीनल जैन जैसी आज़ादी चाहिए, जो विदेश में भारतीय सभ्यता को —

मेरे भारत देश की कुछ तथाकथित सभ्य समाज की औरते पर्दे के बेहद खिलाफ है वो कहती है अगर खुदा को इन्शान से पर्दा करवाना होता तो वो फिर पर्दे के साथ पैदा करता मान लिया की पर्दे में पैदा करता लेकिन जरा इस बात पे गौर किया किसी ने की अगर खुदा ने हमे नंगा ही पैदा किया तो फिर.

ये रेशम के कीड़े जो पेड़-पौधों के माध्यम से रेशम तैयार करते हैं इन्हें इस दुनिया में क्यों भेजता, ये भेंड़ जिस से हम ठण्ड से बचने के लिए ऊन प्राप्त करते हैं ये क्यों भेजता, ये कपास जिस से हम सब अपने रंग बिरंगे कपड़े पहनते है ये क्यों भेजता, खुदा ने हमें नंगा भेजा लेकिन उस नंगे के अंदर एक दिमाग दिया और हम सब की जरुरतो को पूरी करने का सभी साज़ो-सामान भी दिया, जिस से हम जानवरों और इन्शानो में फर्क महसूस कर सके खुदा ने जानवर का दिमाग दिया उसके पेट के सीध में जिस से उस जानवर के लिए भूंख ही सर्वोपरि है लेकिन इन्शान को दिमाग दिया उसके ऊपरी हिस्से में जिसका स्थान सबसे ऊँचा दिया ताकि वो अपने भूंख से बड़ कर भी कुछ सोंच सके.

“अगर खुदा को हमे नंगा रखना ही होता तो शायद ये सब जरूरत के पेड़-पोधे जिस से हम कपड़े बनाते है ये सब ना भेजता” और रही आपकी आज़ादी की बात तो रहिये किसने रोका आपको जाओ बाहर और करों मीनल जैन जैसी आज़ादी का प्रयोग, जाओ बाहर और लगाओ भारत की संस्कार रूपी सभ्यता पे चार चाँद.

ये जो आज़ादी है न ये जिस्म की नुमाइश नहीं होती, हर धर्म ने औरतो का खास ख्याल रखा है किसी ने भी औरत को बंदिश में नहीं रखा सबने औरतो को सर्वोपरि माना है और तुम कहती हो की भारत में आज़ादी नहीं, अगर आपको मीनल जैन जैसी आज़ादी चाहिए तो जाओ बेशक आप अपनी सोंच के मुताबिक़ आज़ाद है आपको कोई नहीं रोकेगा.

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